वीर छत्रसाल की गौरवकथा

धर्मांध औरंगजेब के शासन में हिन्दुओं पर वो जुल्म ढहाये गए कि यदि इनकी कहानी सुनी जाए तो आपनी रातों की नींद और दिन का सुकून गायब हो जाएगा। औरंगजेब ने हिन्दू मंदिरों को तोड़ा, मूर्तियों को खंडित करके अपवित्र कर डाला। हिन्दू महिलाओं के साथ क्या हुआ मैं कहना नहीं चाहूंगा और आप सुन नहीं सकेंगे। अपने आपको आज हिन्दुओं का रक्षक क्षत्रिय कहने वाला राजपूत समुदाय ये सब आंख खोलकर देख रहा था और अपने स्वधर्मियों को लुटते हुए देखकर भी वो मौन था। ये असलियत है ताकतवर हिन्दुओं की जो अप्रत्यक्ष रूप से अपने ही लोगों को लुटवा रहे थे। मंदिरों को तोडऩे का सिलसिला जारी था। ऐसे समय कुछ ऐसे भी लोग हुए जिन्होंने इसका जबर्दस्त प्रतिकार किया। ये कहानी ऐसे ही एक योद्धा की है।
पवित्र और मन को आनंद देने वाला मौसम था। देवी विंध्यवासिनी के मंदिर के पास एक युवक माता के पूजन के लिए फूल तोड़ रहा था तभी कुछ पठान वहाँ आए। अरे सुन......कहो......यहाँ एक देवी का मंदिर है, पता है वो कहाँ है, प्रमुख पठान ने पूछा। युवक ने उन्हें शस्त्रों से सज्जित देखा। उसने सोचा, ये मलेच्छ पठान हैं माता की पूजा करने तो नहीं आ सकते। ये यहाँ के दिखते भी नहीं हैं और जान पड़ता है कि इनको इस क्षेत्र के भुगोल का भी बराबर ज्ञान नहीं है। इनके आने का प्रयोजन क्या है? क्या माता पूजन के लिए आए हो? नहीं....तो तुम्हारा प्रयोजन क्या है?
अरे हम कोई पूजा या बुतपरस्ती के लिए नहीं आए हैं हम तो मंदिर को तोडऩे आए हैं। बता मंदिर कहाँ है? शांत स्वरूपा माँ विंधेश्वरी अब महाकालिका बनकर तांडव करने लगीं। युवक को क्रोध आ गया, ठहरो बताता मंदिर का पता। युवक ने तलवार निकाली और प्रमुख पठान का सिर काट डाला। रक्त की धार बहाता हुआ उसका सिर और धड़ नीचे गिर पड़ा। ये देख बाकी पुंछ दबाकर भाग खड़े हुए। ये युवक वीर छत्रसाल के नाम से प्रसिद्ध हुआ। जिसने भारत के मध्य क्षेत्र से औरंगजेब की मुगलिया सल्तनत का खात्मा कर डाला।

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