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Showing posts from July, 2017

वीर छत्रसाल की गौरवकथा

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धर्मांध औरंगजेब के शासन में हिन्दुओं पर वो जुल्म ढहाये गए कि यदि इनकी कहानी सुनी जाए तो आपनी रातों की नींद और दिन का सुकून गायब हो जाएगा। औरंगजेब ने हिन्दू मंदिरों को तोड़ा, मूर्तियों को खंडित करके अपवित्र कर डाला। हिन्दू महिलाओं के साथ क्या हुआ मैं कहना नहीं चाहूंगा और आप सुन नहीं सकेंगे। अपने आपको आज हिन्दुओं का रक्षक क्षत्रिय कहने वाला राजपूत समुदाय ये सब आंख खोलकर देख रहा था और अपने स्वधर्मियों को लुटते हुए देखकर भी वो मौन था। ये असलियत है ताकतवर हिन्दुओं की जो अप्रत्यक्ष रूप से अपने ही लोगों को लुटवा रहे थे। मंदिरों को तोडऩे का सिलसिला जारी था। ऐसे समय कुछ ऐसे भी लोग हुए जिन्होंने इसका जबर्दस्त प्रतिकार किया। ये कहानी ऐसे ही एक योद्धा की है। पवित्र और मन को आनंद देने वाला मौसम था। देवी विंध्यवासिनी के मंदिर के पास एक युवक माता के पूजन के लिए फूल तोड़ रहा था तभी कुछ पठान वहाँ आए। अरे सुन......कहो......यहाँ एक देवी का मंदिर है, पता है वो कहाँ है, प्रमुख पठान ने पूछा। युवक ने उन्हें शस्त्रों से सज्जित देखा। उसने सोचा, ये मलेच्छ पठान हैं माता की पूजा करने तो नहीं आ सकते। ये यहाँ के द...

वीरमाता चन्द्राणी की कहानी

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ये कथा वीरगाथा के रूप में शताब्दियों से सुनाई जाती रही है। इसलिए ये कथा ऐतिहासिक रूप से पूर्णत: सत्य हो ये आवश्यक नहीं है अत: इस कथा को पूर्णत: सत्य नहीं माना जाना चाहिए। जितनी बार हिलयरी री धरती उतना धोल मैं तने दउ।। अपने बालक को झूले में झुलाती वीरांगना गाते हुए कहती है कि वीरों की धमक से जितनी बार ये वीराधरा धमकी है उतनी बार तेरे झूले को मैं हिलाऊँगी। कहते हैं कि वीर पैदा होते हैं, पर वीर केवल पिता के ओज से नहीं, माता के रक्त से भी संस्कार ग्रहण करते हैं और अगर माता वीरता की प्रतिमूर्ति हो तो पुत्र त्रिलोक अजेय हो जाता है। मैं जो कहानी आपको बताने जा रहा हूँ वो कहानी ऐसी ही एक महिला की है, जिसने एक ऐसे वीर पुत्र को जन्म दिया, जिसने मलेच्छ सल्तनत के छक्के छुड़ाकर मेवाड़ को फिर से राजपूतों के अधीन कर लिया। सन् 1300-1400 ईस्वी की बात है।  मेवाड़ मलेच्छ राजा अलाउद्दीन खिलजी के शासन के अंदर जा चुका था। यहाँ के शासक भीमसिंह मेवाड़ को पुन: प्राप्त करने की आशाएँ खो चुके थे, पर मन में कही एक आशा या कहें विचार उपदता रहता था कि शायद उनके पुत्र अजयसिंह इसे मुक्त करा सकें। अजयङ्क्षसह ...